इन 'खुशियों' से अब तुझे क्या मिलेगा,
जा बेच आ इन्हें बाज़ार मैं, कुछ तो मिलेगा ।।
इस बीमारी मैं अब दवा क्या करेगी,
'दीदार' है मर्ज़, ये डाक्टरी क्या करेगी ।।
बेहोशी के होश मैं,जोश से क्या होगा,
जो होना है वो होगा, 'मस्तांगी' रुत करेगी ।।
हम भी लिख के, समझा के, क्या करेंगे,
जब 'कलम' की हैसियत मालूम होगी तब ही बात बनेगी. . .
- मेहुल नेवासकर
No comments:
Post a Comment