अन्याय के खिलाफ खड़े होने पे देह्द्रोह का मुकदमा चलता है,
भ्रष्टाचार और लूट करो को तो मान सम्मान मिलता है,
सत्यमेव जयते कहे कोई तो पूछे जाते है दस सवाल,
दस सवाल मैं करोडपति बनाने वाले को भगवान् का दर्जा प्राप्त होता है,
समाज रहे ना रहे हमे क्या फर्क,
सचिन रिटायर ना हो जाये इसका डर ज्यादा रहता है,
सत्याग्रह करने वालो पर चलती है लाठियां,
कॉमन की वेल्थ अपने नाम केरने वाले आराम से लेटे है अंगडाइया,
राष्ट्र चिन्हों का इस्तेमाल 'पंजे' और 'कमल' के साथ होता है,
इस बारे मैं जब गर आपत्ति उठाए कोई तो उसे नर्क ही प्राप्त होता है,
इंसानियत तो अब ढूंढे नहीं मिलती,
और इसको छोड़ बाकि सब छुपाये नहीं छुपती ||
[मेहुल नेवासकर]
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