The emotion, the feeling which I experienced today is indescribable.
Trying through a poem :-
आखों के आसूं थम नहीं रहे थे,
दिल की धड़कन तेज हो रही थी,
अफ़सोस, घुस्सा और घ्रणा तप रही थी,
क्यों तुम अपने भगवान् को मारने की चाह रखते हो,
जो तुम्हे इस दुनिया मैं लाए, जिसने तुम्हे सिखाया सब कुछ,
हर वक़्त तुम्हारी चाह को नवाजा, तुमने उन्ही से किया किनारा,
इंसानियत का ये कैसा नकाब है, कैसी ही ये इंसानियत बताओ,
जन्मदाता को तुमने कर दिया बेसहारा, वो मरे या जिए तुम्हे नहीं है गवारा,
नहीं डरते शायद किसी से तुम, नहीं तुम्हे खौफ किसीका,
बस एक बार ये सोच कर देखो, गर कर दिया तुम्हे भी किसी ने 'आवारा' ||
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| [Aamir khan' The Superman] |

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